1984 के सिख नरसंहार के पीड़ितों के समर्थन में 1 नवम्बर को सिख समाज का विरोध प्रदर्शन
1984 के सिख नरसंहार के पीड़ितों के समर्थन में 1 नवम्बर को सिख समाज का विरोध प्रदर्शन
अमित श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ
नेतागिरी की रैली के लिए 1984 के कत्लेआम की तारीख चुनना सिख समाज के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा : आशीष तलवार
लखनऊ। 1 नवम्बर 1984 को देश में हुए सिख नरसंहार की यादें आज भी सिख समाज के हजारों परिवारों के दिलों में ताजा हैं। इस दर्दनाक घटना में अपने परिजनों को खोने वाले परिवार आज भी न्याय और सम्मानजनक माफी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष स. आशीष सिंह तलवार ने कह ऐसे में नरसंहार की बरसी के दिन ही कुछ लोगों द्वारा अपनी राजनीतिक नेतागिरी चमकाने के उद्देश्य से रैली निकालने का निर्णय सिख समाज की भावनाओं को आहत करने वाला है। सिख प्रतिनिधियों ने इसे 1984 के पीड़ित परिवारों के जख्मों को दोबारा कुरेदने वाला कदम बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया है।
निर्मल सिंह अध्यक्ष ने सिख समाज की ओर से अपील की कि 1 नवम्बर को प्रातः 10:30 बजे तक साहिबजादा पार्क, गुरुद्वारा आलमबाग में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर विरोध प्रदर्शन में सहभागिता करें।
मीडिया प्रभारी सतबीर सिंह राजू ने सभी सिख संगठनों, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों, सामाजिक संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों एवं आम नागरिकों से अनुरोध है कि इस शांतिपूर्ण विरोध में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर अपना समर्थन दें।
गुरप्रीत सिंह बग्गा प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने कहा कि 1984 के नरसंहार के दोषियों को आज तक पीड़ित परिवारों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का साहस नहीं हुआ, जबकि इस घटना की बरसी को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और नेतागिरी का माध्यम बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह दिन उन हजारों निर्दोष लोगों की याद और उनके परिवारों के दर्द को सम्मान देने का दिन है, न कि राजनीतिक रैलियां निकालकर उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का।
स. सुरेन्द्र सिंह बक्शी महासचिव यू पी सिक्ख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी ने कहा कि 1 नवम्बर सिख समाज के लिए शोक, स्मरण और न्याय की मांग का दिन है। जिन परिवारों ने अपने पिता, भाई, बेटे और अन्य परिजनों को खोया, उनके दर्द को समझना हर संवेदनशील नागरिक का कर्तव्य है।
रतपाल सिंह गोल्डी ने कहा आज भी पीड़ित परिवार सम्मान और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे दिन पर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन करना उचित नहीं है। हम चाहते हैं कि सभी राजनीतिक और सामाजिक संगठन सिख समाज की भावनाओं का सम्मान करें और इस दिन को राजनीति से दूर रखें।
दिलप्रीत सिंह विर्क क्षेत्रीय अध्यक्ष भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने यह भी कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से केवल सिख समाज की धार्मिक एवं सामाजिक भावनाएं ही आहत नहीं होतीं, बल्कि स्थानीय व्यापारियों, दुकानदारों और आम नागरिकों के हितों की भी अनदेखी होती है।
राजेन्द्र सिंह राजू किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम के कारण व्यापारिक गतिविधियों, बाजारों और आम जनजीवन को प्रभावित करना उचित नहीं है। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन दूसरों की भावनाओं, ऐतिहासिक पीड़ा और व्यापारिक हितों का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है।
पूर्व पार्षद राजू गांधी कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति और संगठन को कार्यक्रम करने का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार के साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। 1 नवम्बर की तारीख सिख समाज के लिए अत्यंत संवेदनशील है। इस दिन राजनीतिक रैली निकालने से न केवल पीड़ित परिवारों की भावनाएं आहत होंगी, बल्कि स्थानीय व्यापारियों और आम जनता को भी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए सभी को आपसी सम्मान और सामाजिक सौहार्द को प्राथमिकता देनी चाहिए।
हरपाल सिंह जग्गी ने कहा कि 1984 की घटनाओं को केवल इतिहास की एक घटना समझकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके पीछे हजारों परिवारों की जिंदगी भर की पीड़ा जुड़ी हुई है। किसी भी समाज के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय उन्हें कुरेदना सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। हमारी मांग है कि पीड़ित परिवारों की भावनाओं का सम्मान किया जाए और 1 नवम्बर को किसी भी प्रकार के राजनीतिक आयोजन से बचा जाए। सभी लोग शांतिपूर्ण तरीके से विरोध में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
राजेन्द्र सिंह बग्गा लक्की ने कहा कि सिख समाज ने हमेशा देश की एकता, अखंडता और मानवता की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
1984 के नरसंहार का दर्द आज भी हमारे बुजुर्गों और पीड़ित परिवारों के दिलों में मौजूद है। हम किसी से टकराव नहीं चाहते, लेकिन अपने समाज के सम्मान और भावनाओं की रक्षा करना हमारा दायित्व है। 1 नवम्बर को सभी सिख भाई-बहन साहिबजादा पार्क, गुरुद्वारा आलमबाग पहुंचकर शांतिपूर्ण विरोध में शामिल हों और एकजुटता का परिचय दें।
मीडिया प्रभारी सतबीर सिंह राजू ने बताया कि इस संबंध में आयोजित प्रेस वार्ता मनमोहन सिंह मोहनी, राजेन्द्र सिंह राजू, ओंकार सिंह पनेसर, भूपिन्दर सिंह पिन्दा, निरवैर सिंह, रणबीर सिंह कलसी, रणबीर सिंह भसीन, दिलमीत सिंह सेठी, टी.पी.एस. तनेजा सहित अनेक सिख प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने एक स्वर में सिख समाज से अपील की कि 1 नवम्बर को होने वाले विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल होकर पीड़ित परिवारों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करें।

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