साइबर अपराधियों से निपटने के गुर सीख रहे जीआरपी के जवान, रक्षित टंडन ने सिखाए बचाव के तरीके
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- Updated: 13 September, 2026 17:01
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साइबर अपराधियों से निपटने के गुर सीख रहे जीआरपी के जवान, रक्षित टंडन ने सिखाए बचाव के तरीके
पुलिस अधीक्षक रेलवे लखनऊ रोहित मिश्रा की पहल पर जीआरपी पुलिस लाइन में हुआ खास प्रशिक्षण।
साइबर विशेषज्ञ रक्षित टंडन ने फिशिंग से लेकर डार्क वेब तक हर खतरे की दी जानकारी।
लखनऊ। बीते शनिवार जीआरपी पुलिस लाइन सभागार में एक अलग ही माहौल देखने को मिला। यहां वर्दीधारी जवान क्लासरूम में बैठे साइबर अपराध के दांव-पेंच समझ रहे थे। पुलिस अधीक्षक रेलवे लखनऊ रोहित मिश्रा के निर्देश पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में साइबर विशेषज्ञ रक्षित टंडन ने जीआरपी कर्मियों को ऑनलाइन दुनिया के खतरों से रूबरू कराया।
कार्यक्रम की शुरुआत फिशिंग, रैनसमवेयर, मैलवेयर और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी जैसे शब्दों से जवानों का परिचय कराने के साथ हुई। साथ ही सोशल मीडिया के दुरुपयोग, पहचान की चोरी और साइबर बुलिंग जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। रक्षित टंडन ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों और डिजिटल डेटा संरक्षण अधिनियम के बारे में भी जानकारी दी, ताकि जवान कानूनी पहलुओं को भी बारीकी से समझ सकें।
प्रशिक्षण में सुरक्षित डिजिटल आदतों पर खास जोर दिया गया। मजबूत पासवर्ड कैसे बनाएं, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल क्यों जरूरी है, और APK, ZIP या IMG फाइल जैसे संदिग्ध लिंक व ईमेल की पहचान कैसे करें, इन सब पर बारीकी से बताया गया। इसके अलावा ऑनलाइन लेनदेन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां, यूपीआई सुरक्षा और ओटीपी या पिन किसी से साझा न करने की सीख भी दी गई।
सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखने, प्राइवेसी सेटिंग्स सही तरीके से इस्तेमाल करने और फेक न्यूज पहचानने के तरीके भी सिखाए गए। साथ ही अगर कोई साइबर हमले या धोखाधड़ी का शिकार हो जाए तो तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए, इसकी भी जानकारी दी गई। शिकायत दर्ज कराने के लिए आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल कैसे करें, यह भी बताया गया।
तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, लॉग फाइलों की जांच करने और साइबर हमलों के शुरुआती संकेत पहचानने के तरीके भी समझाए गए। कार्यस्थल पर सोशल इंजीनियरिंग हमलों जैसे स्पीयर फिशिंग और विशिंग से बचने के उपायों पर भी चर्चा हुई। स्मार्टफोन, टैबलेट और क्लाउड स्टोरेज इस्तेमाल करते समय डेटा लीक से कैसे बचें, यह भी बताया गया।
क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग के नए तरीकों और डार्क वेब से जुड़े खतरों की भी विस्तार से जानकारी दी गई। बच्चों को ऑनलाइन ग्रूमिंग और गेमिंग फ्रॉड से बचाने तथा बुजुर्गों को तकनीकी अज्ञानता के कारण होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी से सुरक्षित रखने के तरीके भी बताए गए। इसके अलावा रेल यात्रा के दौरान यात्रियों के चोरी हुए मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट की बरामदगी में डिजिटल साक्ष्य जुटाने के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की गई।
इस मौके पर पुलिस उपाधीक्षक रेलवे प्रथम व द्वितीय, जीआरपी अनुभाग लखनऊ के सभी प्रभारी निरीक्षक, थानाध्यक्ष और विवेचकगण मौजूद रहे।
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