काकोरी में तकिया शरीफ दरगाह का उर्स आज से शुरू, गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी झलक

काकोरी में तकिया शरीफ दरगाह का उर्स आज से शुरू, गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी झलक

काकोरी में तकिया शरीफ दरगाह का उर्स आज से शुरू, गंगा-जमुनी तहजीब की दिखी झलक

कव्वालों ने गाया कृष्ण का गुणगान, मजहब नहीं बनता मुरीद बनने में रोड़ा

तीन दिन चलेगा उर्स, दुकानदारों को खाना-पानी मुफ्त

काकोरी लखनऊ। काकोरी की तकिया शरीफ दरगाह पर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल माना जाने वाला तीन दिवसीय ऐतिहासिक उर्स सोमवार से शुरू हो गया। यहां उर्स में कव्वाल हमेशा से भगवान कृष्ण की कव्वालियों का गुणगान करते आए हैं। दरगाह पर आने वाले हर श्रद्धालु को गंगा-जमुनी तहजीब की झलक देखने को मिलती है। यहां का मुरीद बनने के लिए मजहब कभी आड़े नहीं आता।

दरगाह का इतिहास भी बड़ा दिलचस्प है। बताया जाता है कि शाह मुस्तफा हैदर कलंदर के मुरीद राजा टिकैत राय थे। राजा बेता नाले पर पुल और शिव मंदिर बनवा रहे थे, तभी उन्हें पता चला कि कलंदर साहब काकोरी में रुके हैं। राजा ने यहीं तीन दिन रुककर 1765 ईस्वी में दोहरी दालान, कुआं और एक कमरे का निर्माण कराया। यही यहां का पहला निर्माण माना जाता है।

दरगाह के गद्दीनशीन रहे शाह मुस्तफा हैदर कलंदर, शाह काजिम कलंदर और शाह तुराब अली कलंदर, सभी भगवान कृष्ण के अनुयायी बताए जाते हैं। मौजूदा गद्दीनशीन शाह ऐनुल हैदर कलंदर उर्फ जिया मियां हैं। शाह तुराब अली कलंदर ने उर्दू में कई भागों में 'शांत रस' नाम से ग्रंथ लिखा। इसमें होली, दिवाली और बसंत पंचमी समेत पूरा ग्रंथ कृष्ण भक्ति में रचा-बसा है। जिया मियां के बेटे जैनुल हैदर अलवी बताते हैं कि उर्स में होने वाली कव्वालियों में कृष्ण से जुड़ी कव्वालियों की संख्या ज्यादा रहती है। यहां श्रद्धालु देश के कोने-कोने से पहुंचते हैं।

मान्यता है कि पहले सुबह-शाम यहां भगवान कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनाई देती थी। कहा जाता है कि यह आवाज यहां खड़े इमली के पेड़ से आती थी और उस पेड़ की हर पत्ती पर राधा-कृष्ण की तस्वीर उभरी रहती थी।

उर्स में बाहर से आने वाले सैकड़ों दुकानदारों के लिए दरगाह की ओर से तीन दिन खाना-पानी मुफ्त रहता है। किसी दुकानदार को परेशानी हो तो दरगाह की तरफ से हरसंभव मदद की जाती है। श्रद्धालुओं के लिए भी यहां इंतजाम रहते हैं।

मेले की सुरक्षा के लिए पुलिस ने चाक-चौबंद व्यवस्था की है। स्थानीय पुलिस के साथ पीएसी के जवान भी तैनात हैं। प्रभारी निरीक्षक सतीश राठौर ने बताया कि कस्बा चौकी प्रभारी अमित चौधरी को मेला प्रभारी बनाया गया है। मेले में कई उपनिरीक्षक और महिला सिपाही भी लगाए गए हैं।

दरगाह की व्यवस्था देख रहे जिया मियां के वंशज जैनुल हैदर अलवी और कमाल अहमद अलवी ने बताया कि उर्स में रोज एक कुल होगा। सोमवार को शाह मुस्तफा हैदर कलंदर, मंगलवार को शाह काजिम कलंदर और बुधवार को शाह तुराब अली कलंदर का कुल होगा।

नगर पंचायत अध्यक्ष रोहित साहू और अधिशासी अधिकारी सुदेश यादव के निर्देश पर पूरे मेला परिसर की साफ-सफाई कराई गई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जगह-जगह कूड़ेदान भी रखवाए गए हैं।

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